इलेक्ट्रिक ऑटोमोबाइल के दुनिया में आई बहुत बड़ी क्रांति, नई बैटरी की खोज ने कीमत को किया काफी कम

Sodium Sulfur Battery Revolution: पूरी दुनिया में इलेक्ट्रिक से चलने वाला ऑटो मोबाइल का बोलबाला बढ़ता जा रहा है, साथ ही इस क्षेत्र में हमेशा कोई ना कोई नई तकनीकों का खोज करके इस पर आने वाली खर्च को कम करने का कोशिश होता रहता है। भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले ऑटोमोबाइल को पीछे छोड़ते जा रहे हैं। इसका प्रमुख कारण इनके द्वारा उत्सर्जित किया गया प्रदूषण है। जो कि हमारे पर्यावरण को बहुत ही ज्यादा मात्रा में प्रदूषित करते हैं।

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नए बैटरी की खोज से इलेक्ट्रिक ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में होगी क्रांति

जितने भी इलेक्ट्रिक से चलने वाले ऑटो मोबाइल बनाए जाते थे, उन सभी में लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल होता था। हाल ही में वैज्ञानिक ने एक बैटरी का आविष्कार किया है, जो लिथियम आयन बैटरी से लगभग 4 गुना ज्यादा पावरफुल है, और इसकी कीमत लिथियम आयन बैटरी की तुलना में काफी कम है।

Sodium Sulfur Battery

यानी कि कम कीमत में ज्यादा पावर फूल बैटरी बनाया गया है, साथ ही ये हमारे पर्यावरण के अनुकूल है। इस बैटरी का आविष्कार वैज्ञानिकों के एक समूह ने मिलकर तैयार किया है। इस आविष्कार से इलेक्ट्रिक वहीकल की पूरी दुनिया बदलने जा रही है। अब इस क्षेत्र में बहुत बड़ी क्रांति होने वाली है।

नई बैटरी की तकनीक की जानकारी कहा से मिली

इस तकनीक की जानकारी हमे torquenews.com के रिपोर्ट के माध्यम से पता चली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने लो कॉस्ट सोडियम-सल्फर बैटरी का निजात यानी की आविष्कार किया है। ये बैटरी वर्तमान समय में इस्तेमाल हो रहे लिथियम आयन की बैटरी की जगह लेने के लिए पूरी तरह से सक्षम है।

इस तकनीक का विकास चीन और ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने साथ मिलकर किया है। जो की पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। अब आप खुद अंदाजा लगा सकते है की लीथियम आयन बैटरी द्वारा इतनी बेहतर रेंज मिलती थी। वही अब ये बैटरी इससे चार गुनी पावरफुल है, तो कितनी रेंज देगी।

सोडियम-सल्फर बैटरी की पावर

ये बैटरी एक ग्राम में 1,017mAh का पावर को जनरेट करने की क्षमता रखती है। इतना ही नहीं प्रयोग के दौरान ये प्राप्त हुए की इसे एक हजार बार चार्ज और डिस्चार्ज करने के बावजूद इसमें करीब आधा पावर बना रहा रहता है।

इस बैटरी में लिथियम बैटरी की तुलना में काफी कम मात्रा में टॉक्सिक का इस्तेमाल होता है। जिसके कारण इस बैटरी की लागत की बहुत ही कम आती है।

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Sharwan Kumar - passionate about content writting. Currently Pursuing B.Tech (Electrical Engineering)

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