बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी क्या है | Battery Swapping Policy in Hindi – 2022

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Battery Swapping Policy (Budget 2022): हर किसी व्यक्ति को देश के नई बजट पास होने का बेसब्री से इंतज़ार होता है। 1 फरवरी 2022 को भारत के वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वर्ष 2022-23 का बजट पेश किया गया। इस बजट के दौरान कई सारे मुद्दे सामने आए और कई नई सरकारी नीति के बारे में बातचीत भी हुई। इस पोस्ट में हम बात करने वाले ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की बजट पेशकश के बारे में।

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को देश मे बढ़ावा देने के लिए भी वित्तमंत्री ने बजट 2022 पेश करने के दौरान खास ध्यान रखा है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने चौथे बजट में भाषण के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर जोड़ देते हुए बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी (Battery Swapping Policy) का घोषणा किया है।

इस नए बैटरी स्वैपिंग पालिसी के आने के बाद इलेक्ट्रिक व्हीकल में बैटरी चार्जिंग (Battery Charging) की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। इस नए पॉलिसी के बाद लोग भी इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदारी के तरफ रुचि दिखाएंगे।

सरकार के इस नीति को पूर्णतया लागू हो जाने के बाद लोगों में इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने को लेकर झिझक दूर होगी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स मार्केट को एक और नया बूस्ट मिलेगा। आइये इस पोस्ट में हम जानते हैं आखिर क्या है बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी, बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी के फायदे और नुकसान, शर्तें और सबकुछ डिटेल में।


बैटरी स्वैपिंग पालिसी क्या है (Battery Swapping Policy in Hindi)

बैटरी स्वैपिंग पालिसी को Union Budget 2022 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया है। इस नई पालिसी के तहत आप अपने इलेक्ट्रिक वाहन (Electric Vehicles) के डिस्चार्ज बैटरी के बदले फुल चार्ज बैटरी को चार्जिंग पॉइंट से रिप्लेस कर सकता है। जिससे आपको अपने बैटरी को चार्ज करने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा और आप बिना समय बर्बाद किये अपने गंतव्य तक पहुँच सकते हो। इंडियन ऑयल ने भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए बैटरी स्वैपिंग सुविधा शुरू कर दी है।

बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी: इवी से लंबा सफर हुआ आसान

चार्जिंग स्टेशन ढूंढना और चार्जिंग के लिए इंतेज़ार जैसी समस्याओं को दूर करेगी नई इलेक्ट्रिक बैटरी स्वैपिंग नीति (Battery Swapping Policy), सभी गाड़ियों में समान बैटरी के लिए इंटरऑपरेबिलिटी स्टैंडर्ड बनेंगे, इवी खरीद के लिए प्रोत्साहित होंगे ग्राहक। तेज़ी से बढ़ रही इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बिक्री, स्वैपिंग से बैटरी चार्जिंग में लगने वाला वक़्त बचेगा

क्या है इलेक्ट्रिक बैटरी स्वैपिंग (What is Battery Swapping)

साधारण शब्दों में जानें तो जैसे की आप अपनी गाड़ी में पेट्रोल, डीजल या सीएनजी भरवाने के लिए पेट्रोल पंप या फ्यूल स्टेशन पर जाते हैं। ठीक वैसे ही बैटरी स्वैपिंग नीति को पूर्णतया लागू हो जाने के बाद आपको रजिस्टर्ड कंपनियों के स्वैपिंग स्टेशन पर जाना होगा।

वहां जाने के बाद आपको अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की पुरानी डिस्चार्ज बैटरी जमा करना होगा और बदले में आपको फुल चार्ज दूसरी बैटरी उस स्टेशन से मिल जाएगी। आपकी समस्या को दूर करने के लिए स्वैपिंग स्टेशन पर कई सारे ब्रांड्स की बैटरी पहले से ही उपलब्ध होंगी, जहां पे लगातार कई बैटरियां चार्ज होती रहेंगी।

आपकी जिस भी कंपनी या जिस भी पावर की बैटरी की जरूरत होगी आप अपनी पुरानी बैटरी को रिप्लेस कर फुल चार्ज बैटरी से कर सकते हैं। आपको फुल चार्ज बैटरी के बदले में कुछ निर्धारित बिल चुकाना होगा। इसका फायदा कोई भी उठा सकता है जिसके पास रजिस्टर्ड इलेक्टिक व्हीकल्स हैं।


Battery Swapping Policy Hindi
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बैटरी स्वैपिंग फायदा ( Battery Swapping Benefits)

बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी का फायदा बहुत बड़े स्तर पर होने वाला है। सबसे बड़ा फायदा आपको आपका कीमती वक़्त बचेगा जो इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने के दौरान बीतता। देखा जाए तो आमतौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी (Electric Vehicle Battery) चार्ज होने में नॉमर्ल चार्जर से 8 से 10 घंटे का समय लगाता है जबकि फास्ट चार्जर से डेढ़ से दो घंटे में बैटरी फुल चार्ज हो जाती है।

इसके अलावा यदि बैटरी चार्जिंग स्टेशन पर भीड़ ज्यादा हुई तो आपको काफी लंबा इंतजार भी करना पड़ सकता है। हो सकता है उस वक़्त आप इमरजेंसी में हो। लेकिन बैटरी स्वैपिंग स्टेशन पर आप अपनी डिस्चार्ज बैटरी की अदला-बदली कर इन सारे झंझट से छुटकारा पा सकेंगे। और अपने गंतव्य स्थान पर शीघ्र ही समय रहते पहुंच सकेंगे। बैटरी स्वैपिंग के तत्काल फायदे क्या क्या हैं उनकी लिस्ट नीचे दी गयी है।


बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी डिटेल (Battery Swapping Policy Details)

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के इंफ्रास्ट्रक्चर और इवी मार्केट को बढ़ावा देने के लिए चौथे बजट (Budget 2022) में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण के दौरान अपनी प्रतिक्रिया साफ स्पष्ट किया है। उनके तरफ से दावा किया जा रहा कि आपकी सरकार बहुत जल्द ही बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी (Battery Swapping Policy) को लेकर आएगी। सरकार के इस नीति के लाने से लोगों में इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने को लेकर झिझक दूर होगी.

लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदना तो चाहते हैं लेकिन चार्जिंग प्रॉब्लम की वजह से वो एक बार के लिए घबरा जाते हैं। लेकिन इस पॉलिसी के तहत आपको अपनी वाहन की बैटरी को चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन (Battery Charging Stations) पर इंतेज़ार करना नही पड़ेगा। आप अपने वाहन की खाली बैटरी को जमा करके नई बैटरी रिप्लेस कर सकते हैं। जिससे आपका सारा काम आसान हो जाएगा और सारी प्रोब्लेम्स ही दूर हो जाएगी।

वित्त मंत्री ने बजट 2022-23 के लिए भाषण के दौरान बताया कि चार्जिंग स्टेशन (EV Charging Stations) स्थापित करने के लिए शहरी क्षेत्रों में जगह की कमी को खास ध्यान रखा है। और बेसक यह नई पॉलिसी इसी को ध्यान में रखकर लाया गया है। लोगो की वाहन बैटरी चार्जिंग की प्रॉब्लम को दूर करेगा। ऐसा हो जाने से अब ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक वाहन की तरफ रुख करेंगे।


बैटरी स्वैपिंग कार्य कैसे करेगा (Battery Swapping Working Model)

  • स्टेपनी की तरह प्री-चार्ज बैटरी रख सकेंगे। वाहन में बैटरी चार्ज करने के बजाय, बैटरी स्टेशन पर अपनी बैटरी जमा कर प्री-चार्ज बैटरी खरीद सकेंगे।
  • बैटरी स्टेशन वाला बैटरी की छमता और क्वालिटी की माप करेगा और उसी छमता, गुणवत्ता वाले बैटरी देगा।
  • लंबी दूरी की यात्रा के दौरान स्टेपनी की तरह बैटरी स्पेयर में भी रख सकते हैं। ताकि डिस्चार्ज होने के बाद आप उसका इमरजेंसी में इस्तेमाल कर सकते हैं।

बैटरी स्वैपिंग की क्यों है आवश्यकता (Battery Swapping Needs)

आपको बता दें कि इलेक्ट्रिक वाहनों के प्लग-इन चार्जर धीमे होते हैं जो किसी भी वाहन को फुल चार्ज करने में 5 से 7 घंटे लगाते हैं। ये समय चार्जर्स की छमता पर भी डिपेंड करता है। और तो और चार्जिंग स्टेशन पर लिमिटिड मात्रा में ही चार्जिंग पॉइंट्स होंगे, जो एक बार ढ़ेर सारे वाहनों को चार्ज करने में सक्षम नहीं होते हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा से ज्यादा घर पर या फिर अपने काम के दौरान चार्ज पर लगा सकते हो। लेकिन यहां भी आपको चार्जिंग करने में बहुत अधिक समय लग जाएगा। ऐसे में बैटरी स्वैपिंग नीति आपको पहले से ही चार्ज किये गये बैटरी को वाहन में लगाकर सफर में रेंज की चिंता नहीं करने का अवसर देगा। यह लंबी यात्रा में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फ्यूल फिलिंग स्टेशन की तरह काम करेगा।


बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी उद्धेश्य (Battery Swapping Policy Objective)

आमतौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरी चार्ज होने में नॉमर्ल चार्जर से 8 से 10 घंटे का समय लगता है और ऐसे में बैटरी स्वैपिंग काफी मददगार साबित होगा। इस बैटरी पॉलिसी को कई उद्धेश्य के लिए लाया गया है। बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी उद्धेश्य की लिस्ट निम्नलिखित हैं

  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ग्रीन तकनीक को बढ़ावा देना
  • चार्जिंग स्टेशन (EV Charging Stations) स्थापित करने के लिए शहरी क्षेत्रों में जगह की कमी
  • सरकार ई-व्हीकल्स के विकास के लिए स्पेशल मोबिलिटी जोन बनाएगी
  • बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी के आने से सरकार बैटरी बनाने के लिए प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देगी
  • सरकार इंटरऑपरेबिलिटी मानकों को तैयार करेगी
  • निजी कारों के लिए 30 फीसदी, वाणिज्यिक वाहनों के लिए 70 फीसदी, बसों के लिए 40 फीसदी और दोपहिया-तिपहिया वाहनों के लिए 80 फीसदी का बिक्री लक्ष्य रखा गया है।

जैसा कि आप सभी जानते जो शहरी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन को लगाना काफी मुश्किल काम है। यह फैसला भी जगह की कमी को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इसके अलावा गवर्नमेंट इंटरऑपरेबिलिटी मानकों को भी तैयार करेगी। ऐसे में वहीं इस पॉलिसी के बाद इलेक्ट्रिक व्हीकल इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ग्रीन तकनीक को काफी हद तक बढ़ावा भी मिलेगा।

यही नहीं इस स्वैपिंग बैटरी पॉलिसी के आने से प्राइवेट सेक्टर में बैटरी बनाने वाली कंपनी को बहुत ज्यादा बढ़ावा मिलेगा। सरकार ई-व्हीकल्स के विकास के लिए स्पेशल मोबिलिटी जोन भी तैयार करेगी।


इलेक्ट्रिक व्हीकल्स चार्जिंग स्टेशन समस्या (Electric Vehicles Charging Stations Problems)

क्या आपको पता है फिलहाल हमारे पूरे देशभर में मात्र 1,028 सार्वजनिक इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन ही हैं। इसके अलावा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के डाटा अनुसार, भारत में कुल 9,74,313 पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहन हैं। यह आंकड़ा साफ दर्शाता है की वाहनों की चार्जिंग समस्या एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है।

हमारे देश भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) की धीमी बिक्री का मुख्यतः दो प्रमुख कारण हैं:

  • इलेक्ट्रिक वाहनों (EV)का महंगा होना
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Charging Stations) की कमी होना

लेकिन ये सारी समस्या परमानेंट नहीं है इसका सॉल्यूशन भी बहुत जल्द हम सभी को मिलने वाला है। आपको बता दें कि देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड और बाउंस जैसी कंपनी इस बैटरी स्वैपिंग (battery swapping) चार्जिंग पॉइंट्स क्षेत्र में कदम रख चुकी है।

अब ऐसे में यह देखना काफी दिलचस्प है कि इस बैटरी स्वैपिंग नीति को सरकार स्वयं संचालित करेगी या इसके लिए कोई पीपीई मॉडल तैयार किया जाएगा। इसका खुलासा गवर्नमेंट द्वारा आने वाले दिनों में किया जाएगा।


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निष्कर्ष (Conclusion)

यह हमारे देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए गवर्नमेंट द्वारा एक अच्छा कदम बढ़ाया गया है। यह फैसला Go green Go India हमारे पर्यावरण संरक्षण पर भी खास असर करेगा। खैर जो भी हो लेकिन इसे जल्द से जल्द लागू करना होगा ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा बढ़ावा मिले। देखा जाए तो वर्तमान में यह कई देशों में लागू किया जा चुका है, अब देखना ये होगा कि हमारे देश में आज आखिर कब तक पूर्णत्या लागू कर दिया जाएगा।

आशा करता हूँ आप सभी पाठकों को हमारा यह पोस्ट बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी क्या है (Battery Swapping Policy in Hindi) काफी हद तक पसंद आया होगा। इसके माध्यम से हमने टॉपिक से जुड़ी सटीक जानकारी आप सभी तक पहुचाने का प्रयास किया है।

यदि इस पोस्ट में किसी भी प्रकार का कोई त्रुटि हो तो आप हमसे संपर्क जरूर करें। इसके अलावा आप अपनी राय और सुझाव भी हमें कमेंट करके दे सकते हैं।

धन्यवाद:)

FAQs (Frequently Asked Questions)

बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी क्या है?

Ans: चार्जिंग स्टेशन ढूंढना और चार्जिंग के लिए इंतेज़ार जैसी समस्याओं को दूर करेगी नई इलेक्ट्रिक बैटरी स्वैपिंग नीति (Battery Swapping Policy). इस नई पालिसी के तहत आप अपने इलेक्ट्रिक वाहन (Electric Vehicles) के डिस्चार्ज बैटरी के बदले फुल चार्ज बैटरी को चार्जिंग पॉइंट से रिप्लेस कर सकता है।

बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी के उद्धेश्य क्या है?

Ans: पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ग्रीन तकनीक को बढ़ावा देना, चार्जिंग स्टेशन (EV Charging Stations) स्थापित करने के लिए शहरी क्षेत्रों में जगह की कमी सरकार ई-व्हीकल्स के विकास के लिए स्पेशल मोबिलिटी जोन बनाएगी बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी के आने से सरकार बैटरी बनाने के लिए प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देगी, सरकार इंटरऑपरेबिलिटी मानकों को तैयार करेगी निजी कारों के लिए 30 फीसदी, वाणिज्यिक वाहनों के लिए 70 फीसदी, बसों के लिए 40 फीसदी और दोपहिया-तिपहिया वाहनों के लिए 80 फीसदी का बिक्री लक्ष्य रखा गया है।

बैटरी स्वैपिंग के फायदा क्या है?

Ans: सबसे बड़ा फायदा आपको आपका कीमती वक़्त बचेगा जो इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने के दौरान बीतता। देखा जाए तो आमतौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी (Electric Vehicle Battery) चार्ज होने में नॉमर्ल चार्जर से 8 से 10 घंटे का समय लगाता है जबकि फास्ट चार्जर से डेढ़ से दो घंटे में बैटरी फुल चार्ज हो जाती है।

बैटरी स्वैपिंग कार्य कैसे करेगा?

Ans: स्टेपनी की तरह प्री-चार्ज बैटरी रख सकेंगे। वाहन में बैटरी चार्ज करने के बजाय, बैटरी स्टेशन पर अपनी बैटरी जमा कर प्री-चार्ज बैटरी खरीद सकेंगे। बैटरी स्टेशन वाला बैटरी की छमता और क्वालिटी की माप करेगा और उसी छमता, गुणवत्ता वाले बैटरी देगा। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान स्टेपनी की तरह बैटरी स्पेयर में भी रख सकते हैं। ताकि डिस्चार्ज होने के बाद आप उसका इमरजेंसी में इस्तेमाल कर सकते हैं।

बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी की क्यों है आवश्यकता

Ans: बैटरी स्वैपिंग नीति आपको पहले से ही चार्ज किये गये बैटरी को वाहन में लगाकर सफर में रेंज की चिंता नहीं करने का अवसर देगा। यह लंबी यात्रा में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फ्यूल फिलिंग स्टेशन की तरह काम करेगा।

From (Patna, Bihar) Rahul is the founder of blog Ecovahan. Computer Science Engineer and Passionate Blogger. संकल्प करें इलेक्ट्रिक चुनें

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